सत्ता, संघर्ष और सस्पेंस: ईरान संकट से कांपी वैश्विक राजनीति

       तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान की सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्ला अली खामेनेई की संयुक्त अमेरिका-इजरायल हवाई हमलों में मौत की पुष्टि की गई है। बताया जा रहा है कि 28 फरवरी 2026 को तेहरान स्थित उनके आधिकारिक आवास और कार्यालय को निशाना बनाया गया था। 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता थे।

हमले का विवरण

       रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम से बड़े पैमाने पर हवाई एवं मिसाइल अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य ईरान के सैन्य ढांचे और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने वाला “निर्णायक कदम” बताया, जबकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई कहा और ईरानी जनता से “भविष्य के लिए खड़े होने” की अपील की।

       ईरानी मीडिया का दावा है कि हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के वरिष्ठ कमांडर और रक्षा प्रतिष्ठान के कुछ शीर्ष अधिकारी भी मारे गए हैं, हालांकि स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित है।

40 दिन का राष्ट्रीय शोक

       ईरान सरकार ने खामेनेई को “शहीद” घोषित करते हुए देशभर में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की है। धार्मिक स्थलों पर विशेष प्रार्थनाएं और शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं। तेहरान सहित कई शहरों में भारी सुरक्षा तैनाती देखी गई है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

       हमले के तुरंत बाद ईरान ने इजरायल और क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। कतर, बहरीन और जॉर्डन में स्थित कुछ सैन्य अड्डों को निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर “कड़ी सजा” का वादा किया है। क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा है और तेल बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय चिंता

       संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक शक्तियों ने संयम बरतने और तत्काल तनाव कम करने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित कर सकती है और व्यापक संघर्ष का खतरा भी बढ़ा सकती है।

उत्तराधिकार पर अनिश्चितता

       खामेनेई के निधन के बाद ईरान में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। देश की सर्वोच्च धार्मिक संस्था “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” नए सुप्रीम लीडर का चयन करेगी। खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई का नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

आगे क्या?

       विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिन निर्णायक होंगे। क्या ईरान और उसके सहयोगी व्यापक जवाबी रणनीति अपनाएंगे? क्या अमेरिका-इजरायल गठबंधन आगे भी अभियान जारी रखेगा?

       एक बात स्पष्ट है—यह घटना केवल ईरान की राजनीति नहीं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक भू-राजनीति की दिशा बदल सकती है।

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