रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर हलचल तेज हो गई है। विधानसभा के भीतर भाजपा विधायक ओपी चौधरी द्वारा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत का नाम राज्यसभा के संदर्भ में लिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। क्या कांग्रेस अपने सबसे अनुभवी चेहरे को दिल्ली भेजेगी, या स्थानीय संतुलन साधेगी?
सवाल: क्या महंत ही सबसे मजबूत दावेदार?
कांग्रेस खेमे में चर्चा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और सक्ती से विधायक डॉ. चरण दास महंत अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के कारण स्वाभाविक दावेदार हैं। विपक्ष पूछ रहा है—क्या विधानसभा में मुखर नेता को हटाकर कांग्रेस अपनी आवाज कमजोर करेगी? वहीं समर्थकों का तर्क है कि दिल्ली में मजबूत प्रतिनिधित्व पार्टी के लिए रणनीतिक लाभ होगा।
सवाल: स्थानीय बनाम हाईकमान का फैसला?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने संकेत दिए हैं कि स्थानीय नेताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। क्या यह संदेश हाईकमान तक असर डालेगा? या अंतिम फैसला दिल्ली दरबार ही तय करेगा?
अन्य नामों की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में टीएस सिंहदेव और फूलो देवी नेताम जैसे नाम भी तैर रहे हैं। सवाल उठता है—क्या कांग्रेस सामाजिक समीकरण साधने के लिए नया चेहरा आगे करेगी?
भाजपा का क्या रुख?
भाजपा खेमे में यह संदेश देने की कोशिश है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस है। भाजपा नेताओं का कहना है कि “विपक्ष पहले अपना घर संभाले।” हालांकि संख्याबल के हिसाब से राज्य की दो सीटों में से एक-एक सीट भाजपा और कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है।
चुनावी कैलेंडर
राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं। नामांकन 26 फरवरी से 5 मार्च तक, जबकि मतदान 16 मार्च को प्रस्तावित है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ सीट का नहीं, बल्कि 2028 की राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत भी होगा।
सारांश
क्या कांग्रेस अनुभव को प्राथमिकता देगी या संगठनात्मक संतुलन को? क्या डॉ. चरण दास महंत दिल्ली की राह पकड़ेंगे, या विधानसभा में ही विपक्ष की कमान संभाले रहेंगे? फैसला चाहे जो हो, छत्तीसगढ़ की सियासत में यह चुनाव नई रणनीतियों और समीकरणों की पटकथा लिखने जा रहा है।