अहिवारा। अछोटी स्थित अभ्युदय संस्थान के रजत जयंती समारोह का दूसरा दिन 11 जनवरी को अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देशभर से जुड़े जीवन विद्या केंद्रों के प्रतिनिधियों, प्रबोधकों और समाजसेवियों ने सहभागिता की।
सुबह के सत्र में नव-स्थापित जीवन विद्या केंद्रों के प्रतिनिधियों ने अपनी गतिविधियों और सामाजिक उपलब्धियों को साझा किया। इसके बाद मध्यस्थ दर्शन के आलोक में चेतना विकास और मूल्य शिक्षा विषय पर पेनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें सोम त्यागी, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, डॉ. साधन भट्टाचार्य, अशोक गोपाला, अनिता शाह, डॉ. संकेत ठाकुर, कल्पेश वरू, रविकांत मणि, अंकित पोंगुला, हिमांशु दुग्गड, गोपाल अग्रवाल, विनोद शर्मा एवं गौरी साहू सहित अनेक विद्वानों ने अपने अनुभव साझा किए।
पेनल चर्चा के समापन पर अहिवारा नगर पालिका अध्यक्ष विद्यानंद कुशवाह ने संस्थान की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पंडित राजन शर्मा का स्मरण करते हुए उन्हें समाजसेवा की प्रेरणा का स्रोत बताया।
इस अवसर पर सोम त्यागी ने कहा कि वर्ष 2001 में अभ्युदय संस्थान की स्थापना अस्तित्व मूलक, मानव केंद्रित चिंतन के प्रसार हेतु की गई थी। उन्होंने कहा कि संस्थान की सोच है — कुटुंब से विश्व परिवार और फिर सार्वभौम परिवार की ओर मानवता को आगे बढ़ाना। उन्होंने बताया कि एनआईटी रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन और दिल्ली सरकार के हैप्पीनेस करिकुलम के माध्यम से जीवन विद्या को समाज तक पहुँचाया गया।
पूर्व सांसद अभिषेक सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य और अभ्युदय संस्थान दोनों ने 25 वर्ष पूरे किए हैं और संस्थान ने मध्यस्थ दर्शन के माध्यम से मानवीय मूल्य आधारित समाज के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिससे इसकी पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी है।
दिव्य पथ संस्थान की शारदा शर्मा (अंबा दीदी) ने जीवन विद्या को मानवता के लिए अस्तित्व की अमूल्य देन बताया, जबकि डॉ. साधन भट्टाचार्य ने अभ्युदय संस्थान को मानवीय शिक्षा के लोकव्यापीकरण का मील का पत्थर कहा।
शाम के सत्र में सार्थक गीत-संगीत एवं नृत्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने समूचे वातावरण को उल्लास से भर दिया।
इस अवसर पर धरसीवां विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने रजत जयंती प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कहा कि अभ्युदय संस्थान की 25 वर्षों की यात्रा सेवा, समर्पण और शुचिता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने संस्थान से जुड़े सभी सदस्यों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा अभ्युदय परिवार के सदस्यों से आत्मीय संवाद भी किया।