कलम का अपमान? कथाकार मनोज रुपड़ा से बदसलूकी का मामला चर्चा में

कुलपति आलोक चक्रवाल को हटाने की मांग

लेखक-संस्कृतिकर्मियों और पत्रकारों ने राष्ट्रपति के नाम पर राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

       रायपुर। 8 जनवरी 2025 को लेखक-पत्रकार और संस्कृतिकर्मियों ने अंबेडकर चौक से राजभवन तक पैदल मार्च करते हुए कुलपति के खिलाफ नारेबाजी की। लेखक-पत्रकार और संस्कृतिकर्मी की ओर से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया।

       सामाजिक कामों में सक्रिय डाक्टर राकेश गुप्ता ने लेखक मनोज रुपड़ा के साथ कुलपति के व्यवहार को दुर्भाग्यजनक बताया। उन्होंने कहा कि कुलपति चक्रवाल ने पद की गरिमा का माखौल उड़ाया है। उन्हें एक मिनट भी पद में बने रहने का अधिकार नहीं है।

       जन संस्कृति मंच से संबंद्ध कवयित्री रूपेंद्र तिवारी ने कहा कि एक लेखक के साथ बदसुलूकी करने के बाद कुलपति ने स्वयं को बौना साबित कर दिया है। उन्होंने कुलपति को पद से हटाने की मांग की।

       पत्रकार और संस्कृतिकर्मी राजकुमार सोनी ने प्रतिवाद सभा में बताया कि देशभर के लेखकों और बुद्धिजीवियों ने मनोज रुपड़ा के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है। उन्होंने कहा कि दक्षिणपंथी ताकतें शब्दों की सत्ता से सदैव भय खाती है और सच से घबराती है। कुलपति को एक लेखक की बात इसलिए खराब लगी क्योंकि लेखक ने सच बोला था।

       प्रतिवाद सभा में प्रगतिशील लेखक संघ और इप्टा के मिन्हाज असद, जनवादी लेखक संघ के पीसी रथ, नंदन ध्रुव, पत्रकार रुचिर गर्ग, समीर दीवान, सुदीप ठाकुर, प्रेस क्लब रायपुर के अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर, संस्कृतिकर्मी नौसान अकरम, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, रंगकर्मी शेखर नाग, बिंदिया नाग, ओपी सिंह, इंद्र कुमार राठौर सहित उपस्थित प्रबुद्धजनों ने अपना आक्रोश प्रकट करते हुए कुलपति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

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