September 28, 2026

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छत्तीसगढ़ की लय को विनोद कुमार शुक्ल ने अपनी रचनाओं में साध लिया था – प्रो. सियाराम शर्मा

विनोद कुमार शुक्ल याद किए गए

जन संस्कृति मंच के शोक सभा में जुटे साहित्यकार

       दुर्ग। सुप्रसिद्ध कवि कथाकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल के निधन से संपूर्ण साहित्य जगत में रिक्तता और मायूसी का माहौल है। उनका विपुल साहित्य और सादगी भरा जीवन रचनाकारों के लिए प्रेरणापुंज है। उनकी स्मृति में जन संस्कृति मंच दुर्ग-भिलाई इकाई ने शोक सभा का आयोजन हिंदी डिजिटल कक्ष कल्याण महाविद्यालय भिलाई में किया। उपस्थित साहित्यकारों और पाठकों ने शुक्ल जी को शिद्दत से याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

       आलोचक सियाराम शर्मा ने विनोद जी से जुड़े अपने अमूल्य पलों को याद किया। उन्होंने कहा कि एक बड़ा रचनाकार वह होता है, जो किसी समाज, देश के जीवन की लय को पकड़ लेता है। छत्तीसगढ़ की लय को विनोद कुमार शुक्ल ने अपनी रचनाओं में साध लिया था।

       आदिवासियों के जीवन संघर्ष और भय को लेकर मुख्यधारा के सशक्त कवियों में विनोद जी अग्रणी हैं।

       कवि परमेश्वर वैष्णव ने विनोद जी को याद करते हुए कहा “उनका सहसा जाना छत्तीसगढ़ सहित समूचे विश्व के लिए अपूरणीय क्षति है।”

       प्रसिद्ध कथाकार कैलाश बनवासी ने कहा कि विनोद जी एक गहरे स्वप्न में जीने वाले रचनाकार थे। उस स्वप्न में मनुष्य की सहृदयता, प्रकृति और जीवन के प्रति प्रेम, और एक बेहतर कल बसता है। ‘दीवार में खिड़की रहती थी’ इसका अनुपम उदाहरण है। उनके उपन्यास ‘खिलेगा तो देखेंगे’ के कुछ प्रसंगों का उदाहरण देकर बताया कि छत्तीसगढ़ के राग-रंग में वे सबसे गहरे रचे-बसे रचनाकार थे।

       अंचल के जाने-माने कथाकार लोकबाबू ने अपने संस्मरणों में विनोद जी को याद किया।

       कवयित्री पूर्णिमा साहू ने विनोद कुमार शुक्ल जी का संक्षिप्त जीवन परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने शुक्ल जी को समर्पित अपनी कविता ‘सायकिल’ का पाठ भी किया।

       रंगकर्मी शालिनी त्रिपाठी ने शुक्ल जी को काव्यमयी श्रद्धांजलि अर्पित की।

       अंचल के विशिष्ट कवि घनश्याम त्रिपाठी ने शुक्ल जी से अपने पहले मिलन के अनुभव को साझा किया।

       युवा आलोचक अंबरीश त्रिपाठी ने शुक्ल जी के साथ अपनी स्मृतियों को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक सर्जक थे और सर्जना के माध्यम से वे हमारे बीच हमेशा मौजूद रहेंगे।

       रचनाकार मीना गुप्ता जी ने कहा कि यथार्थ को देखने का उनका अपना एक नज़रिया था।

       अभिषेक पटेल ने ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ उपन्यास के माध्यम से विनोद जी की भाषागत विशिष्टताओं को रेखांकित किया।

       प्रसिद्ध शायर मुमताज ने लीलाधर मंडलोई, विष्णु नागर के साथ विनोद जी से आत्मीय मिलन की स्मृ‌तियों को साझा किया।

       कवि विजय वर्तमान ने विनोद जी पर केंद्रित अपनी कविता का पाठ किया।

       वरिष्ठ पत्रकार विमलशंकर झा, शायर नौशाद सिद्दीकी, दिव्या और उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने भी विनोद जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

       श्रद्धांजलि सभा का संचालन अशोक तिवारी तथा धन्यवाद ज्ञापन एन. पापाराव ने किया।