मारपीट के आरोपों पर सख्त कार्रवाई, आगरा कैंट स्टेशन मामले की जांच के लिए समिति गठित

       आगरा। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट (डीएसएस) नरेंद्र चाहर और आरपीएफ जवानों के बीच हुई मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना 12 जुलाई को उस समय हुई, जब एक महिला यात्री की मदद के लिए नरेंद्र चाहर ने हीराकुंड एक्सप्रेस को रुकवाया, जिसके बाद आरपीएफ कर्मियों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि बहस के दौरान आरपीएफ जवानों ने उनके साथ मारपीट की और घसीटते हुए ले गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे प्रशासन ने चार आरपीएफ जवानों को निलंबित कर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।

       मामले में अब नया मोड़ तब आया, जब मेडिकल रिपोर्ट में नरेंद्र चाहर के बाएं कान का पर्दा फटने की पुष्टि हुई। उनकी शिकायत पर जीआरपी ने आरोपी आरपीएफ जवानों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच टीम ने प्लेटफॉर्म के सीसीटीवी डीवीआर को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है तथा महिला यात्री और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

       इधर, घटना के विरोध में ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन सहित कई रेलवे कर्मचारी संगठनों ने देशभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आगरा, गया, सिमुलतला और मुरादाबाद समेत कई रेल मंडलों में कर्मचारियों ने विरोध जताते हुए दोषी आरपीएफ जवानों को केवल निलंबित नहीं, बल्कि सेवा से बर्खास्त करने की मांग की है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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