लंबे विवाद के बाद साफ हुआ रास्ता—अजीत मिश्रा की टीम के पक्ष में फैसला

       बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब के चुनाव को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहा विवाद अब लगभग समाप्त हो गया है। राज्य शासन ने चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली अपील को खारिज करते हुए नई कार्यकारिणी को वैध ठहरा दिया है। इस फैसले के साथ ही अजीत मिश्रा की टीम की जीत पर अंतिम मुहर लग गई, जबकि अपीलकर्ता दिलीप यादव को बड़ा झटका लगा है।

       वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप सचिव द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि अपीलकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी और स्वयं चुनाव में भाग लिया था। ऐसे में बाद में चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता।

चुनाव प्रक्रिया और विवाद की पृष्ठभूमि

       प्रकरण के अनुसार प्रेस क्लब के तत्कालीन सचिव दिलीप यादव ने 7 सितंबर 2025 को चुनाव कराने के लिए अपने करीबी महेश तिवारी को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया था। इसके बाद 9 सितंबर को जल्दबाजी में चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया।

       इसी दौरान सहायक पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाएं, बिलासपुर द्वारा संस्था के पदाधिकारियों को अधिनियम की धारा 27 और 28 के उल्लंघन को लेकर नोटिस भी जारी किया गया था।

       इसके बावजूद 19 सितंबर 2025 को 563 सदस्यों की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव संपन्न कराया गया। लेकिन यह मतदाता सूची पंजीयक कार्यालय से प्रमाणित नहीं थी, जिससे चुनाव को लेकर विवाद की स्थिति बन गई।

रजिस्ट्रार ने चुनाव घोषित किया अमान्य

       सहायक पंजीयक की अनुशंसा पर रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ ने 19 सितंबर को हुए चुनाव को अमान्य घोषित करते हुए 18 नवंबर 2025 को नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश जारी किया।

       रजिस्ट्रार के आदेश के पालन में जिला प्रशासन ने सहायक पंजीयक बिलासपुर को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया। इसके बाद वर्ष 2023 की मतदाता सूची के आधार पर 447 वैध सदस्यों के बीच 28 दिसंबर 2025 को दोबारा चुनाव कराया गया, जिसमें दिलीप यादव सहित अन्य प्रत्याशियों ने भी हिस्सा लिया।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

       इस बीच दिलीप यादव ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रजिस्ट्रार के आदेश को निरस्त करने और उस पर रोक लगाने की मांग की थी। न्यायालय के निर्देश के बाद मामला शासन के समक्ष अपील के रूप में प्रस्तुत किया गया।

       29 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता दिलीप यादव उपस्थित नहीं हुए, जबकि अन्य पक्षों ने जानकारी दी कि 28 दिसंबर को चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

शासन का स्पष्ट निर्णय

       आदेश में कहा गया कि यदि अपीलकर्ता को चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति थी, तो उसे चुनाव शुरू होने से पहले ही अपील करनी चाहिए थी। चूंकि अपीलकर्ता स्वयं चुनाव में शामिल हुए और बाद में परिणाम को चुनौती दी, इसलिए यह विधि के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है।

       इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी प्रक्रिया में स्वेच्छा से भाग लेने के बाद उसी प्रक्रिया की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता।

नई कार्यकारिणी को मिली वैधता

       सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद शासन ने अपील को खारिज कर दिया और सहायक पंजीयक बिलासपुर को अधिनियम की धारा 27 एवं 28 के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

       बताया गया कि इस मामले में अजीत मिश्रा की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन अग्रवाल और टैक्स कंसलटेंट सचिन कुमार सिंघल ने प्रभावी पैरवी की। शासन के फैसले के बाद प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी को आधिकारिक वैधता मिल गई है और अजीत मिश्रा की टीम की जीत पर अंतिम मुहर लग गई है।

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